उड़ान
वो देखो शिकारी आया संग अपने है धनुष बाण लाया डोरी खिंची तीर चलाया मेरे पंखों को है निशाना बनाया निर्जीव सी काया हुई लहूलुहान गिरी धम से धरती की…
वो देखो शिकारी आया संग अपने है धनुष बाण लाया डोरी खिंची तीर चलाया मेरे पंखों को है निशाना बनाया निर्जीव सी काया हुई लहूलुहान गिरी धम से धरती की…
नभ से उतर चारों दिशाओं में बिखरी हूँ मैं प्रकृति की मुस्कुराहट हूँ मैं एक नए जीवन का संदेशा लाई हूं मैं मेरे आने की आहट सुन खिल उठा…