क्षमा और शक्ति

किसने कहा कब कहा क्यों कहा  यह उसकी है खता  तु क्यों विचलित होता है  औरों के दिए हुए गम तले  तू क्यों दबता चला जाता है  जिंदगी के अनमोल…

वजूद

ना जकड़ इन बेड़ियों में खुद को  तोड़ दे इन सलाखों को  सहनशीलता के चादर तले ना ढक  अपने इन जख्मों को  हुँकारा भरने दे सोए हुए अरमानों को  उड़…

उड़ान

वो देखो शिकारी आया  संग अपने है धनुष बाण लाया  डोरी खिंची तीर चलाया  मेरे पंखों को है निशाना बनाया  निर्जीव सी काया हुई लहूलुहान  गिरी धम से धरती की…