ज़िंदा है तू !
ये दुनिया सुख दुख का मेला है इस मेले में तू क्यों अकेला है ग़म को ना समझ बोझ यह तो खुशी महसूस कराने का बस एक तरीका है तो…
वजूद
ना जकड़ इन बेड़ियों में खुद को तोड़ दे इन सलाखों को सहनशीलता के चादर तले ना ढक अपने इन जख्मों को हुँकारा भरने दे सोए हुए अरमानों को उड़…
