उड़ान

वो देखो शिकारी आया  संग अपने है धनुष बाण लाया  डोरी खिंची तीर चलाया  मेरे पंखों को है निशाना बनाया  निर्जीव सी काया हुई लहूलुहान  गिरी धम से धरती की…

साँसों का खेल

दुनिया में आने से लेकर जाने तक  बिना रुके बिना थमे  अंत तक चलती हैं ये धड़कनें  वक्त के रफ्तार को बयां करती है ये धड़कनें    हर आने वाली…

रश्मि – सूरज की किरण

नभ से उतर  चारों दिशाओं में बिखरी हूँ मैं  प्रकृति की मुस्कुराहट हूँ मैं  एक नए जीवन का संदेशा लाई हूं मैं    मेरे आने की आहट सुन  खिल उठा…

कुदरत की देन

कुदरत की कोख में  समाए कितने अनमोल रत्न हैं   एक बार चार दीवारी से बाहर झांक कर तो देख  थोड़ा करीब आकर तो देख   चित्त शांत और मन…