ज़िंदा है तू !
ये दुनिया सुख दुख का मेला है इस मेले में तू क्यों अकेला है ग़म को ना समझ बोझ यह तो खुशी महसूस कराने का बस एक तरीका है तो…
क्षमा और शक्ति
किसने कहा कब कहा क्यों कहा यह उसकी है खता तु क्यों विचलित होता है औरों के दिए हुए गम तले तू क्यों दबता चला जाता है जिंदगी के अनमोल…
उड़ान
वो देखो शिकारी आया संग अपने है धनुष बाण लाया डोरी खिंची तीर चलाया मेरे पंखों को है निशाना बनाया निर्जीव सी काया हुई लहूलुहान गिरी धम से धरती की…
साँसों का खेल
दुनिया में आने से लेकर जाने तक बिना रुके बिना थमे अंत तक चलती हैं ये धड़कनें वक्त के रफ्तार को बयां करती है ये धड़कनें हर आने वाली…
कुदरत की देन
कुदरत की कोख में समाए कितने अनमोल रत्न हैं एक बार चार दीवारी से बाहर झांक कर तो देख थोड़ा करीब आकर तो देख चित्त शांत और मन…
