रश्मि – सूरज की किरण
नभ से उतर चारों दिशाओं में बिखरी हूँ मैं प्रकृति की मुस्कुराहट हूँ मैं एक नए जीवन का संदेशा लाई हूं मैं मेरे आने की आहट सुन खिल उठा…
नभ से उतर चारों दिशाओं में बिखरी हूँ मैं प्रकृति की मुस्कुराहट हूँ मैं एक नए जीवन का संदेशा लाई हूं मैं मेरे आने की आहट सुन खिल उठा…
कुदरत की कोख में समाए कितने अनमोल रत्न हैं एक बार चार दीवारी से बाहर झांक कर तो देख थोड़ा करीब आकर तो देख चित्त शांत और मन…