ज़िंदा है तू !

ये दुनिया सुख दुख का मेला है  इस मेले में तू क्यों अकेला है  ग़म को ना समझ बोझ  यह तो खुशी महसूस कराने का बस एक तरीका है  तो…

उड़ान

वो देखो शिकारी आया  संग अपने है धनुष बाण लाया  डोरी खिंची तीर चलाया  मेरे पंखों को है निशाना बनाया  निर्जीव सी काया हुई लहूलुहान  गिरी धम से धरती की…